छत्तीसगढ़ का सरगुजा ज़िला इन दिनों रामगढ़ पर्वत (Ramgarh Parvat Committee) को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलचलों का केंद्र बना हुआ है। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण यह पर्वत न केवल पुरातत्वविदों की रुचि का विषय है, बल्कि हाल के दिनों में खनन गतिविधियों से जुड़े विवादों के चलते भी चर्चा में है।

भाजपा ने बनाई तीन सदस्यीय समिति

भारतीय जनता पार्टी, छत्तीसगढ़ ने प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव के निर्देश पर तीन सदस्यीय समिति गठित की है, जो रामगढ़ पर्वत से जुड़े तथ्यों का अध्ययन करेगी। समिति में पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा (संयोजक), विधायक रेणुका सिंह और प्रदेश महामंत्री अखिलेश सोनी शामिल हैं।

समिति सात दिनों के भीतर स्थल का दौरा कर रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व को सौंपेगी। भाजपा का कहना है कि अन्य राजनीतिक दलों द्वारा भ्रांतियाँ फैलाने के बजाय वास्तविक तथ्यों को जनता के सामने रखा जाना आवश्यक है।

Ramgarh Parvat Committee

रामगढ़ का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व

रामगढ़ पर्वत, जिसे स्थानीय रूप से रामगिरी (Ramgarh Parvat Committee) भी कहा जाता है, अम्बिकापुर से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित है। यह स्थल अपनी प्राचीन गुफाओं — सिटाबेंगा और जोगीमारा — के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाना जाता है।

  • सिटाबेंगा गुफा को कुछ विद्वान दुनिया का सबसे पुराना प्राकृतिक थिएटर मानते हैं।
  • जोगीमारा गुफा में ब्राह्मी लिपि के अभिलेख और रंगीन भित्ति चित्र मौजूद हैं, जिन्हें एशिया की शुरुआती पेंटिंग्स में गिना जाता है।
  • स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम, सीता और लक्ष्मण वनवास के दौरान यहां कुछ समय रुके थे।

खनन और पर्यावरणीय खतरे को लेकर उठे सवाल

हाल ही में यह क्षेत्र कोयला खदानों से जुड़ी गतिविधियों के कारण चर्चा में आया। बताया गया कि प्रस्तावित खनन क्षेत्र रामगढ़ स्थल से लगभग 11 किलोमीटर की दूरी पर है।

पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर चिंता जताई कि कोयला खदानों में ब्लास्टिंग से रामगढ़ (Ramgarh Parvat Committee) की प्राचीन गुफाएँ और पर्यावरणीय संतुलन खतरे में पड़ सकते हैं। उन्होंने मांग की कि इस सांस्कृतिक धरोहर की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

पर्यावरणविदों का कहना है कि यह केवल एक ऐतिहासिक स्थल ही नहीं, बल्कि आदिवासी समुदायों की आस्था और जीवन से भी जुड़ा है। दूसरी ओर, खनन से जुड़े पक्षों का तर्क है कि परियोजना विकास और ऊर्जा उत्पादन के लिए आवश्यक है और सुरक्षा मानकों का पालन किया जाएगा।

आगे क्या?

अब सबकी निगाहें भाजपा की इस समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो अगले सात दिनों में सामने आएगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह रिपोर्ट न केवल रामगढ़ (Ramgarh Parvat Committee) की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेगी, बल्कि प्रदेश की राजनीतिक दिशा और खनन नीति पर भी असर डाल सकती है।

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