सुनीता विलियम्ससुनीता विलियम्स

सुनीता विलियम्स ने अपनी भारतीय जड़ों से जुड़ने के लिए कई बार भारत की यात्रा की है। उनकी यात्राओं में व्यक्तिगत और पेशेवर दोनों पहलू शामिल रहे हैं। यहाँ उनकी कुछ उल्लेखनीय भारत यात्राओं का विवरण है:

2013 की यात्रा: 2012 में अपनी दूसरी अंतरिक्ष यात्रा (एक्सपीडिशन 32/33) के बाद, सुनीता 2013 में फिर से भारत आईं। इस बार वह नासा के प्रतिनिधि के रूप में आईं और विभिन्न शैक्षणिक और वैज्ञानिक कार्यक्रमों में भाग लिया। दिल्ली और अन्य शहरों में उन्होंने छात्रों और युवाओं से मुलाकात की, और अंतरिक्ष अनुसंधान के बारे में प्रेरणादायक व्याख्यान दिए। इस दौरे में भी उन्होंने अपनी भारतीय जड़ों का उल्लेख किया और इसे अपनी पहचान का हिस्सा बताया।

पद्म भूषण समारोह (2008): हालांकि यह एक अलग यात्रा नहीं थी, लेकिन 2008 में भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। यह सम्मान समारोह दिल्ली में हुआ, और इसके लिए उनकी उपस्थिति की संभावना रही होगी, हालाँकि इसकी पुष्टि के लिए स्पष्ट दस्तावेज़ सीमित हैं। यह सम्मान उनकी उपलब्धियों और भारतीय मूल को मान्यता देने वाला था।

इन यात्राओं के दौरान सुनीता ने न केवल अपने परिवार के मूल स्थान को देखा, बल्कि भारतीय संस्कृति और लोगों से भी जुड़ाव महसूस किया। वह अक्सर अपनी भारतीय पृष्ठभूमि को गर्व के साथ याद करती हैं, और उनकी अंतरिक्ष यात्राओं में भारतीय तत्वों (जैसे भगवद्गीता या भारतीय भोजन) को शामिल करना इस बात का प्रमाण है। उनकी यात्राएँ सीमित रही हैं, क्योंकि उनका अधिकांश समय नासा के मिशनों और अमेरिका में बीतता है, लेकिन जब भी वह भारत आईं, उन्होंने अपनी जड़ों के प्रति सम्मान और लगाव दिखाया।

क्या सुनीता विलियम्स अपने भारतीय होने पर गर्व करती है?

सुनीता विलियम्स ने अपनी भारतीय जड़ों के प्रति गर्व और सम्मान व्यक्त किया है, हालांकि वह अमेरिकी नागरिक हैं। उनके पिता दीपक पंड्या गुजरात के मेहसाना जिले के झुलासन गांव से हैं, और वह अपने पैतृक गांव का दौरा कर चुकी हैं। 2007 में भारत यात्रा के दौरान, उन्होंने अपनी भारतीय विरासत के बारे में बात की और इसे एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना।

इसके अलावा, भारत सरकार ने उन्हें 2008 में पद्म भूषण से सम्मानित किया, जो उनके योगदान और भारतीय मूल को मान्यता देता है। उन्होंने अंतरिक्ष मिशनों के दौरान भी भारतीय संस्कृति को साथ ले जाने का प्रयास किया, जैसे कि श्रीमद्भगवद्गीता को अपने साथ ले जाना। यह दर्शाता है कि वह अपनी भारतीय पहचान से जुड़ी हुई हैं और उस पर गर्व महसूस करती हैं, भले ही उनका पेशेवर जीवन नासा और अमेरिकी अंतरिक्ष कार्यक्रमों के साथ रहा हो।

हालांकि, उनके मुंह से सीधे “मुझे भारतीय होने पर गर्व है” जैसे शब्दों का कोई स्पष्ट सार्वजनिक बयान दर्ज नहीं है, लेकिन उनके कार्य और व्यवहार से यह भावना झलकती है।

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