रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में सर्व आदिवासी समाज ने हमर राज (Sarva aadivasi samaj chhattisgarh) पार्टी बनाकर छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में ताल ठोक दिया है. एक सामाजिक संगठन का एकाएक चुनाव कूद जाना सभी को हैरान करने वाली खबर थी. लेकिन भानुप्रतापपुर उपचुनाव में लगभग 25 हजार वोट लेकर उत्साह से भरे सर्व आदिवासी समाज का मनोबल इतना बढ़ चूका है कि छत्तीसगढ़ के 50 सीटों पर चुनाव लड़ने जा जा रही है.

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अब सवाल यह उठता है कि सर्व आदिवासी समाज (Sarva aadivasi samaj chhattisgarh) के चुनाव लड़ने से किसे सबसे ज्यादा नफा नुकसान होगा? क्या सर्व आदिवासी समाज कांग्रेस का वोट काट देगी और उसे बहुमत से दूर कर देगी? या भाजपा के वोट बैंक में सेंधमारी कर उन्हें सत्ता से फिर से पांच सालों के लिए बेदखल कर देगी.

यह सत्य है कि सर्व आदिवासी समाज (Sarva aadivasi samaj chhattisgarh) के बारे में उन आदिवासियों को बहुत कम जानकारी होगी जो इस संगठन से जुड़े नहीं है. इसमें समाज को प्रबुद्ध से लेकर सर्वहारा वर्ग तक के लोग जुड़े है एवं इनकी अच्छी खासी आबादी छत्तीसगढ़ में है. लेकिन सर्व आदिवासी समाज भी यह स्वीकार करेगी कि छत्तीसगढ़ में वे न तो सरकार बनाने की स्थिति में हैं और न ही आदिवासी समाज से बाहर उनका अभी कोई वोट बैंक तय है.

छत्तीसगढ़ के आदिवासी दशकों से कांग्रेस के परंपरागत वोटर रहे है. पिछले 15 सालों में सत्ता में रही बीजेपी लेकिन कांग्रेस के परम्परागत वोटों में सेंधमारी नहीं कर पायी. आज भाजपा छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रो से पूरी तरह साफ है. ऐसे में सर्व आदिवासी समाज की हमर राज पार्टी कांग्रेस को सबसे ज्यादा नुकसान पहूँचायेंगे यही सभी अनुमान लगा रहे है. लेकिन एक विचार यह भी निकलकर आता है कि सर्व आदिवासी समाज भाजपा का वोट काटेगी.

आइये समझते है. दरअसल भाजपा का आदिवासी क्षेत्रों में कोई जनाधार नहीं है ऐसा नहीं है. आदिवासी क्षेत्रों में भाजपा का वोट बैंक वे आदिवासी रहे है जो साक्षर, नौकरीपेशा और व्यापारी वर्ग से आते है. इसके अलावा किसान और महिलाएं भी भाजपा को वोट करती रही है तभी तो भाजपा 15 सालों तक सत्ता में काबिज रही. सर्व आदिवासी समाज भी कभी कांग्रेस तो कभी भाजपा को समर्थन दे कर मोल भाव करते रही है.

लेकिन भानुप्रतापपुर उपचुनाव में सर्व आदिवासी समाज के प्रत्याशी अकबर कोर्राम को मिले वोटों ने पूरा गणित बिगाड़ दिया एवं नतीजे ने सभी को चौका दिया. दरअसल सर्व आदिवासी समाज ने इस बार भाजपा का वोट काट दिया था. 21 हजार वोटों से भाजपा प्रत्याशी ब्रम्हानंद नेताम हार चुके थे और जो जीत के लिए 20 से 25 हजार वोटों की जरुरत भाजपा को थी उसे सर्व आदिवासी समाज (Sarva aadivasi samaj chhattisgarh) ने ले लिया था. हालाँकि किसी चुनाव् में कई विषय मुद्दे और प्रबंधन से जुड़े पहलुओं का भी प्रभाव होता है.

आगामी चुनाव में कांग्रेस का वोटबैंक परंपरागत आदिवासियों के साथ वे लोग भी होंगे जो बढ़े हुए धान की कीमत, बोनस और छत्तीसगढ़ियावाद से प्रभावित होंगे .ऐसे में सर्व आदिवासी समाज (Sarva aadivasi samaj chhattisgarh) कही भाजपा का ही वोट न काट दे यह भी कयास लगाये जा रहे है. बहरहाल घोषणापत्र, लोकलुभावन वादें एवं बदलते राजनीतिक समीकरण में कब क्या हो जाये राजनीति में अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

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