Uniform civil code india: भारत में लंबे समय से ही ‘समान नागरिक संहिता‘ एक “जटिल” और “चुनावी” मुद्दा रहा है। धर्म और कानून से जुड़ा विषय होने के कारण यह सालभर चर्चा में बना रहता है। हाल ही में उत्तराखंड सरकार द्वारा इसे लागू करने की संभावनाओं के चलते यह फिर से चर्चा में है।

समान नागरिक संहिता के बारे में

समान नागरिक संहिता‘ का प्रावधान संविधान के भाग 4 के तहत अनुच्छेद-44 में किया गया है। इसके प्रबल समर्थक बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जी थे। गोवा एकमात्र राज्य जहां समान नागरिक संहिता लागू किया गया है। ‘समान नागरिक संहिता‘ का अर्थ राज्य के सभी नागरिकों के लिए एक समान दीवानी नियमों (जैसे- तालाक, विवाह, उत्तराधिकार, निवास संबंधी नियम आदि) का निर्माण करना चाहे वह किसी भी धर्म का हो। इसे लागू करने के कई लाभ और नुकसान हो सकते है। आइए इनके बारे में संक्षेप में जानते हैं। Uniform civil code india

समान नागरिक संहिता को लागू करने के पक्ष में निम्न तर्क प्रस्तुत किए जाते है-

  1. इससे देशवासियों में एकता बड़ेगी,
  2. न्यायालयों में कानूनी जटिलताएं कम होंगी,
  3. लैंगिक न्याय और महिला सशक्तिकरण,
  4. राष्ट्रीय अखंडता और धर्मनिरपेक्षता की भावना आयेगी,
  5. वोट बैंक की राजनीति में कमी आयेगी,
  6. सुभेद्य समूहों के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, Uniform civil code india

वही इसके आलोचक समान नागरिक संहिता के विपक्ष में निम्न बातें प्रस्तुत करते हैं-

  1. इससे देश की विविधता एवं बहुसांस्कृतिक पहचान को नुकसान होगा,
  2. अल्पसंख्यकों के ऊपर बहुसंख्यकों के नियम को थोपे जाने का डर,
  3. संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 में प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के उलंघन का डर,
  4. धर्म की राजनीति को बड़ावा,
  5. धर्म के अंदर अलग-अलग जातियों, जनजातियों सभी के लिए एक समान नियम बनाना चुनौतीपूर्ण।

दोनो पक्षों को जानने वाले विशेषज्ञ एवं आशावादी लोग इसके लिए निम्न उपाय सुझाते है-

  1. समान नागरिक संहिता‘ को क्रमिक रूप से लागू करना चाहिए न कि एक ही आदेश से (21वीं विधि आयोग की सिफारिश अनुसार)
  2. विभिन्न धर्मों के अंदर भी जातिगत कई नियम और कानून है जिनमे पहले समानता लानी चाहिए (विधि आयोग)
  3. पहले सभी धर्म के सिविल, पर्सनल कानूनों (Personal Law’s) को व्यवस्थित (Codify) करना चाहिए।
  4. यह मांग स्वयं समुदाय से आए तब समान नागरिक संहिता को लागू करना चाहिए।
  5. जब भी विधि बने सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइन और निर्देशों अनुसार इसका अनुपालन किया जाए। Uniform civil code india
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