छत्तीसगढ़ पटवारी संघ के बैनर तले चल रही प्रदेशभर के पटवारियों की हड़ताल पर भूपेश सरकार ने सख्त एक्शन लेते हुए 7 जून को एस्मा लगा दिया। जिसके बाद प्रदेश भर में पटवारियों द्वारा इसका विरोध प्रारंभ हो गया बालोद में हड़ताल रथ पटवारियों ने उस राजपत्र की प्रतियां जलाई जिसके तहत एस्मा (ESMA imposed in chhattisgarh) पटवारियों पर लगाया गया था।

एस्मा (ESMA) कानून क्या है?

एस्मा का पूर्ण रूप एसेंशियल सर्विसेज मेंटेनेंस एक्ट 1979 होता है। जिसे हिंदी में अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम कहा जाता है। इसे लगाने का अधिकार राज्य सरकार को होता है इसके लग जाने के बाद कर्मचारियों को किसी भी प्रकार के हड़ताल की इजाजत नहीं होती यदि वह ऐसा करते हैं तो कानून के अनुसार स्वता ही दे अपनी नौकरी से हाथ धो बैठते हैं।

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क्या है पटवारी संघ की मांग?

लगातार 23 दिन से पटवारी संघ अपने 8 सूत्री मांग को लेकर आंदोलनरत थे। यह मांग थे वेतन विसंगति को दूर करना, वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति देना, संसाधन भत्ता स्टेशनरी भत्ता, पटवारी भर्ती के लिए योग्यता को स्नातक करने की मांग कार्यालय मैं निवास की बाध्यता खत्म करना, बिना विभागीय जांच के एफ आई आर ना किया जाए आदि। ESMA imposed in chhattisgarh

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पटवारी संघ ने सरकार के कड़े रुख के प्रति अपना जबरदस्त विरोध जताया है। आने वाले समय में हड़ताल में जुटे कर्मचारी और सरकार के बीच गतिरोध बढ़ सकता है। इस बीच जनता परेशान है युवाओं के परीक्षाओं के अंतिम दिवस निकल रहे हैं। आय प्रमाण पत्र, जमीन की रजिस्ट्री लेन देन आदि पूर्ण तरीके से बाधित है। ESMA imposed in chhattisgarh

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