डोंगरगांव विधानसभा सीट जिसने डॉ. रमन सिंह के रूप में छत्तीसगढ़ को भाजपा का पहला मुख्यमंत्री दिया उसकी एक अलग ही कहानी है जिसे आप में से बहुत कम लोग जानते होंगे। दरअसल यहां 2013, 2018 और 2023 में कांग्रेस को जीत मिली है। लेकिन तमाम सर्वे और अनुमानों में वहां की जनता मानती कि वह भाजपा को ही चुनेगी लेकिन हर बार यहां बीजेपी की गलती से कांग्रेस विधायक दलेश्वर साहू (Daleshwar Sahu Dongargaon) की जीत हो जाती है।

कांग्रेसी स्वयं भी मानते है यहां उन्हे लड़ना नहीं पड़ता बल्कि बीजेपी की गलती उन्हे जीता देती है। विधायक दलेश्वर साहू के बारे में डोंगरगांव क्षेत्र के लोग यहां तक कह रहे थे कि उन्हें इस बार टिकट भी नही मिलेगा लेकिन शायद कांग्रेस को पता था उनके अलावा कांग्रेस के पास कोई दमदार साहू चेहरा नहीं है इसलिए फिर से उन्हें ही टिकट दे दिया गया। Daleshwar Sahu Dongargaon

भाजपा जो पूरे प्रदेश में जातिगत समीकरण को ध्यान में रखती है यहां आकर स्थिति भांप पाने में फेल हो जाती है। और गलती कर बैठती है। 2009 से इस सीट से खेदूराम साहू ने जीत दर्ज की थी जिसके बाद से आज तक इस सीट से किसी भी साहू को मौका नहीं दिया गया। यह क्षेत्र के साहू कार्यकर्ताओं का मानना है। Daleshwar Sahu Dongargaon

2013 में दिनेश गांधी को मौका दिया सामान्य होने के कारण हारे। 2018 में मधुसूदन यादव चुनाव हारे और अब 2023 में भरत वर्मा चुनाव हार गए है। भरत वर्मा 2789 वोटों के मामूली अंतर से हारे यह बताता है कि जनता दलेश्वर साहू को बदलना चाहती थी लेकिन भाजपा सही चेहरा देने में फेल रही और फिर मामूली अंतर से दलेश्वर साहू को फिर चुन लिया। Daleshwar Sahu Dongargaon

यहां जनता इतनी हताश थी कि हमर राज पार्टी के छतर राज चंद्रवशी को भी जमकर वोट किया है। यह पहली दफा है जब डोंगरगांव विधानसभा से किसी तीसरे दल को इतना अधिक वोट दिया गया है। भविष्य में दलेश्वर साहू तब तक जीतते रहेंगे जब तक बीजेपी कोई साहू को टिकट न दे दे। यह बात क्षेत्र में संघ और संगठन से जुड़े लोग भी कहते है कि भाजपा डोंगरगांव अपने गलती से हारती है। बहरहाल, हमारा मानना है कि लोकतंत्र में हर जीते व्यक्ति का सम्मान होना चाहिए। Daleshwar Sahu Dongargaon

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