देश का बजट अक्सर टैक्स, सब्सिडी और लोकल योजनाओं तक सीमित चर्चा में फंस जाता है, लेकिन बजट  2026–27 (Budget 2026 Analysis) को अगर गहराई से देखा जाए तो यह केवल एक घरेलू आर्थिक दस्तावेज़ नहीं बल्कि भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति का स्पष्ट संकेत देता है। खासकर यूरोपीय संघ के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते—जिसे ‘Mother of All Trade Deals’ कहा जा रहा है—के संदर्भ में यह बजट एक तरह से प्री-FTA ब्लूप्रिंट जैसा दिखता है। बजट के प्रावधान यह संकेत देते हैं कि भले ही EU–India FTA अभी अंतिम रूप से साइन न हुआ हो, लेकिन भारत ने उसकी तैयारी शुरू कर दी है।

क्या भारत में बजट की गुणवत्ता अब ‘मुफ्त घोषणाओं’ से तय होती है?

EU के साथ FTA का मतलब केवल आयात-निर्यात शुल्क कम करना नहीं होता। यह एक ऐसे बाजार में प्रवेश है जहां पर्यावरण मानक, श्रम कानून, कार्बन उत्सर्जन, ट्रेसिबिलिटी और नियामकीय पारदर्शिता सबसे बड़ी शर्तें हैं। बजट 2026 इन सभी मोर्चों पर भारत को सक्षम बनाने की कोशिश करता दिखाई देता है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में PLI स्कीम का विस्तार, ग्रीन और क्लीन मैन्युफैक्चरिंग पर जोर, तथा MSME सेक्टर के लिए टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन यह संकेत देता है कि भारत अब केवल “Make in India” तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि “Make for the World”, खासकर EU जैसे सख्त बाजार के लिए खुद को तैयार कर रहा है।

यूरोपीय संघ का CBAM यानी कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म आज वैश्विक व्यापार की सबसे बड़ी हकीकत बन चुका है। ऐसे में बजट 2026 (Budget 2026 Analysis) में ग्रीन हाइड्रोजन, रिन्यूएबल एनर्जी, एनर्जी स्टोरेज और कार्बन मार्केट फ्रेमवर्क पर किया गया निवेश केवल पर्यावरणीय चिंता नहीं, बल्कि निर्यात रणनीति का हिस्सा है। सरकार यह स्वीकार करती दिखती है कि आने वाले समय में भारतीय उत्पाद तभी यूरोपीय बाजार में टिक पाएंगे जब वे लो-कार्बन और सस्टेनेबल होंगे। यह बजट ग्रीन ट्रांजिशन को नैतिक बहस से निकालकर आर्थिक अनिवार्यता के रूप में पेश करता है।

FTA का लाभ तभी वास्तविक होता है जब देश की लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन मजबूत हो। बजट 2026 में PM गति शक्ति, मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, पोर्ट कनेक्टिविटी और डिजिटल कस्टम्स पर दिया गया जोर इस बात का संकेत है कि भारत अब लागत और समय—दोनों मोर्चों पर प्रतिस्पर्धी बनना चाहता है। चीन, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों से मुकाबले में EU बाजार तक तेज और सस्ती पहुंच भारत के लिए निर्णायक होगी, और बजट इसी बाधा को दूर करने की दिशा में बढ़ता दिखता है।

कृषि और फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में भी बजट का रुख EU-केंद्रित नजर आता है। यूरोपीय संघ मात्रा से ज्यादा गुणवत्ता और मानकों को महत्व देता है। बजट में फूड प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, कोल्ड चेन और वैल्यू एडिशन पर फोकस इस बात का संकेत है कि भारत अब केवल कच्चा कृषि उत्पाद निर्यात करने के बजाय प्रोसेस्ड, सर्टिफाइड और हाई-वैल्यू फूड प्रोडक्ट्स के जरिए EU बाजार में अपनी जगह बनाना चाहता है।

सेवा क्षेत्र, खासकर IT, डिजिटल सर्विसेज़ और स्टार्टअप्स, EU–India FTA का सबसे मजबूत स्तंभ हो सकता है। बजट 2026 (Budget 2026 Analysis) में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, स्किलिंग, AI और साइबर सिक्योरिटी पर निवेश इस दिशा में भारत की रणनीतिक तैयारी को दर्शाता है। यह साफ है कि भारत केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि सेवाओं के क्षेत्र में भी यूरोपीय बाजार में अपनी उपस्थिति मजबूत करना चाहता है।

यूरोपीय निवेशकों के लिए नीति स्थिरता और टैक्स का वातावरण सबसे अहम मुद्दा होता है। बजट 2026 का संतुलित टैक्स अप्रोच, विवाद समाधान पर जोर और दीर्घकालिक नीति संकेत यह संदेश देते हैं कि भारत EU कंपनियों के लिए एक भरोसेमंद निवेश गंतव्य बनना चाहता है। यह बजट आक्रामक कर नीति की बजाय विश्वास निर्माण की भाषा बोलता है।

कुल मिलाकर, बजट 2026 (Budget 2026 Analysis) को केवल एक साल का वित्तीय दस्तावेज़ मानना इसकी भूमिका को कम आंकना होगा। यह बजट भारत को एक ऐसे वैश्विक व्यापार भागीदार के रूप में तैयार करने की कोशिश है जो EU जैसे नियम-आधारित और उच्च मानकों वाले बाजार के लिए खुद को सक्षम बना सके। FTA भले अभी कागजों पर हो, लेकिन बजट 2026 यह साफ करता है कि भारत ने ‘Mother of All Trade Deals’ की दिशा में अपने घर की तैयारी शुरू कर दी है।

स्तंभकार: नितिन कुमार साहू (PRO, संस्थापक – द पब्लिको इंडिया)

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