Deepak Baij congressछत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज

कर्नाटक सरकार के आरक्षण फैसले पर भाजपा की आपत्ति क्यों?

भाजपा को एसटी, एससी और ओबीसी आरक्षण से समस्या क्यों हो रही?

रायपुर, 17 मार्च 2025 – कर्नाटक में कांग्रेस सरकार द्वारा सरकारी ठेकों में एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यकों के लिए 4% आरक्षण लागू करने के फैसले पर भाजपा नेताओं ने कड़ा विरोध जताया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा के इस रवैये को सामाजिक न्याय विरोधी बताते हुए कहा कि भाजपा नहीं चाहती कि वंचित वर्ग को बराबरी का अवसर मिले।

President of Chhattisgarh Pradesh Congress Committee Deepak Baij
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज

“भाजपा को यह बर्दाश्त नहीं हो रहा कि कांग्रेस सरकार पिछड़े वर्गों को आरक्षण क्यों दे रही है। भाजपा इस आरक्षण को केवल मुस्लिम समुदाय का लाभ बताकर जनता को गुमराह कर रही है, जबकि यह एससी, एसटी और ओबीसी को भी दिया गया है।” – दीपक बैज

छत्तीसगढ़ में आरक्षण विधेयक पर भाजपा की भूमिका

छत्तीसगढ़ में भी भाजपा का सामाजिक न्याय विरोधी चरित्र साफ नजर आ रहा है। कांग्रेस सरकार द्वारा विधानसभा में पारित 76% आरक्षण विधेयक को राजभवन में रोककर रखा गया है। दीपक बैज ने कहा कि भाजपा देशभर में वंचित वर्गों के अधिकार छीनना चाहती है और बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के संविधान को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।

छत्तीसगढ़ में लंबित आरक्षण विधेयक के मुख्य बिंदु:

  • आदिवासी समाज के लिए – 32%
  • अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए – 27%
  • अनुसूचित जाति (SC) के लिए – 13%
  • आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लिए – 4%

भाजपा सरकार से कांग्रेस के सवाल

  • भाजपा ने दो साल से आरक्षण विधेयक को राजभवन में बंधक क्यों बना रखा है?
  • राज्यपाल बदले जा चुके हैं, फिर भी विधेयक पर हस्ताक्षर क्यों नहीं हुए?
  • क्या भाजपा छत्तीसगढ़ के आदिवासी और पिछड़ा वर्ग से बदला ले रही है?

भाजपा की नीतियों से वंचितों का हक छीना जा रहा है

कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने हमेशा सामाजिक न्याय की वकालत की है, जबकि भाजपा केवल अपने पूंजीपति मित्रों की चिंता करती है।

भाजपा सरकार के सामाजिक न्याय विरोधी कदम:

वन अधिकार अधिनियम में संशोधन – स्थानीय आदिवासियों को जल, जंगल, जमीन के अधिकारों से वंचित किया गया।

कमर्शियल माइनिंग की अनुमति – पहली बार देश में आदिवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक खनन की अनुमति देकर स्थानीय लोगों को विस्थापित किया गया।

नो-गो एरिया को संकुचित किया – जैव विविधता वाले क्षेत्रों में खनन की अनुमति देकर पर्यावरण और स्थानीय समुदायों को नुकसान पहुंचाया गया।

आरक्षित वर्गों के हक छीने गए – भाजपा सरकार ने शिक्षा, सरकारी नौकरियों और विकास योजनाओं में आरक्षित वर्गों की भागीदारी को सीमित किया।

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