रायपुर: भारतीय जनता पार्टी ने 17 अगस्त 2023 को आगामी छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव (BJP declare chhattisgarh assembly tickets) के मद्दे नजर सभी राजनीतिक विश्लेषकों को चौंकाते हुए उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी। भाजपा ने 21 विधानसभा सीटों की प्रथम सूची जारी की यह वह विधानसभा सीट है जहां भाजपा या तो कमजोर स्थिति में है या पिछले 15 सालों और उससे अधिक समय तक यहां भाजपा का कोई भी प्रत्याशी विजित नहीं हुआ है। BJP declare chhattisgarh assembly tickets

इन 21 नामों में 5 महिला प्रत्याशी का नाम भी जारी हुआ है। भटगांव, प्रतापपुर, सरायपाली, खल्लारी एवं खुज्जी विधानसभा से महिलाओं को कमान सौंपी गई है। जबकि चर्चित नमो में पाटन की VVIP सीट से BJP से दुर्ग के सांसद विजय बघेल को मैदान में उतारा है। गौरतलब है कि विजय बघेल रिश्ते में CM भूपेश बघेल के भतीजे लगते है एवं 2008 की छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में वे भूपेश बघेल को हरा भी चुके है। शायद यही वजह है कि बीजेपी ने राजनीतिक शतरंज में राजा भूपेश के खिलाफ ही घेरे बंदी शुरू की है।

भाजपा ने 21 नामों को जारी करते हुए यह संदेश दे दिया कि चुनाव में राज्य के नेताओ की कोई लॉबी काम नही करेगी। साथ ही राज्य चुनाव समिति और विधानसभा प्रभारियों की राय की जगह टिकट वितरण में सर्वे को ही मुख्य आधार माना जाएगा..! भाजपा ने मरवाही विधानसभा सीट से प्रणव मरपच्ची जो कि एक सरपंच है। जबकि प्रेमनगर से भूलन सिंह जो कि उपसरपंच (BJP declare chhattisgarh assembly tickets) है को टिकट देकर यह संदेश देने की कोशिश की कि भाजपा में सामान्य कार्यकर्ता को भी टिकट मिलता है।

वही पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के परिवार से आने वाले विक्रांत सिंह को खैरागढ़ से एवं मोहेला मानपुर से राजपरिवार से आने वाले संजीव शाह जैसे लोगों को भी टिकट दिया गया है। गोंड समाज के बड़े नेता रामविचार नेताम को रामानुजगंज से टिकट देकर सरगुजा संभाग में उनके चेहरे का लाभ उठाना चाहती है।

ऐसे नेताओं को भी टिकट दिया गया है जिन्हे भाजपा में जुड़े महज 2 साल हुए है। डोंडी लोहारा के प्रत्याशी देवलाल ठाकुर, राजिम के प्रत्याशी रोहित साहू एवं खुज्जी विधानसभा की प्रत्याशी गीता घासी साहू को टिकट देकर भाजपा ने वहां लंबे समय से कार्यकर रहे भाजपा नेताओं को नाराज (BJP declare chhattisgarh assembly tickets) कर दिया।

अन्य सीटों पर नए नामो को टिकट देकर भाजपा ने स्थानीय नेताओं तक को चौका दिया। सूत्रों की माने तो टिकट वितरण में केवल सर्वे सूची को ही आधार बनाया गया जो केंद्र और राज्य की एजेंसियां कर रही थी। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा बिना राज्य के भाजपा नेताओं की बैठक उनसे राय मशविरा के टिकट वितरण की रणनीति बीजेपी को लाभ पहुंचाएगी या यह रणनीति एकबार फिर भाजपा की लुटिया डूबा देगी..!

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