कांकेर | भानुप्रतापपुर विधानसभा उपचुनाव की गहमागहमी में हर दिन बड़े उलटफेर देखने मिल रहा है। इस उपचुनाव को दोनों ही पार्टी अपने प्राण प्रतिष्ठा की लड़ाई समझकर लड़ रही है क्योंकि इस चुनाव के परिणाम से राज्य की जनता में बहुत बड़ा संदेश जाने वाला है। आइए समझने की कोशिश वे कौन से कारक है जिनके चलते ऐसा कहा जा रहा है कि भाजपा प्रत्याशी ब्रह्मानंद नेताम की बड़े अंतर से जीत होगी। Bhanupratappur chunav bramhanand netam

छत्तीसगढ़ में आरक्षण विवाद: इतिहास, वर्तमान और भविष्य

सर्व आदिवासी समाज बना कांग्रेस के लिए चुनौती


उपचुनाव की घोषणा के बाद से ही 32% आरक्षण को लेकर नाराज सर्व आदिवासी समाज ने पहले तो कांग्रेस का वोट काटने के लिए हर बूथ पर अपने करीब 300 प्रत्याशी उतारने की घोषणा की। बाद में अपना प्रत्याशी खड़ा करके गांव गांव में यह शपथ दिलवाई कि कांग्रेस और भाजपा को वोट न डालकर सर्व आदिवासी समाज के प्रत्याशी को ही वोट दिया जाएगा। यह निश्चित रूप से कांग्रेस के लिए सरदर्द बन गया है।

पृथक भानुप्रतापपुर जिले का मुद्दा

भानुप्रतापपुर विधानसभा के कई गांव से ऐसी खबरें रोज समाचारों में छप रही है कि ग्रामवासियों ने अलग जिले की घोषणा न करने पर कांग्रेस को वोट नहीं देने की ठान कर बैठे है। ये सीधे तौर पर कांग्रेस के लिए चिंता का विषय है। Bhanupratappur chunav bramhanand netam

भानूप्रतापपुर उपचुनाव: किन मुद्दों पर लड़े जायेंगे?

नेताम की गिरफ्तारी की खबर बिगाड़ सकती है खेल

2019 के प्रकरण में झारखंड पुलिस द्वारा भाजपा प्रत्याशी के विरुद्ध गंभीर धाराओं में अपराध पंजीबद्ध को ठीक चुनाव के पूर्व उजागर करना फिर झारखंड पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के लिए भानुप्रतापपुर पहुंचकर पतासाजी करना कांग्रेस के लिए बैक फायर भी साबित हो सकता है।

ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि जिन गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है उसमे बिना वारंट के भी तत्काल गिरफ्तारी की जा सकती है परंतु यदि उन्हें गिरफ्तार नही किया जाता तो भाजपा यह प्रचारित करने में कामयाब हो जायेगी कि कांग्रेस केवल राजनीतिक लाभ के लिए ऐसे प्रपंच रच रही है। यह नेताम को सहानुभूति वोट दिलवा सकते है। Bhanupratappur chunav bramhanand netam

अकबर कोर्राम काटेंगे कांग्रेस का वोट?

सर्व आदिवासी समाज के प्रत्याशी आदिवासी बाहुल भानुप्रतापपुर क्षेत्र में कांग्रेस के वोट काटेंगे ऐसी बाते भानुप्रतापपुर में आम है। दरअसल जो भाजपा के ओबीसी और परंपरागत वोटर है जो सालों से भाजपा को वोट देते आ रहे है वो तो भाजपा को देंगे ही लेकिन जिस 40-60 हजार वोट से जीत हार का फैसला होता है यदि वो कांग्रेस से छीन गया तो ब्रह्मानंद नेताम बड़े अंतर से चुनाव जीत सकते है। Bhanupratappur chunav bramhanand netam

नही देंगे इस बार कई लोग वोट?

ग्रामीण इलाकों में समाज स्तर पर यह निर्धारित किए जाने कि खबर है कि भाजपा और कांग्रेस की रैली, सभा में शामिल न हो। बात नही मानने वाले पर 5000 रुपए का जुर्माना भी बांधा गया है। इससे कई लोग मतदान प्रक्रिया में भाग नही लेंगे ऐसा अनुमान भी लगाया जा रहा है

तो ये वो तमाम कारक और वजहें है जिन्होंने कांग्रेसी खेमे में खलबली मचा दी है। भाजपा की नींद भी हराम है क्योंकि उनके प्रत्याशी पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। बहरहाल चुनाव का परिणाम क्या होगा यह तो मतपत्र खुलने के बाद ही पता चलेगा लेकिन जैसे जैसे चुनाव नजदीक आते जा रहे यह उपचुनाव बहुत ही रोचक होता जा रहा है।

 

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