मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज मकर संक्रांति के पावन अवसर पर नवा रायपुर अटल नगर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित ‘‘पतंग उत्सव‘‘ (Patang Utsav Chhattisgarh) में शामिल हुए।

उन्होंने प्रदेशवासियों को मकर संक्रांति, पोंगल, गुड़ीपड़वा और लोहड़ी की शुभकामनाएं दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पर्व सूर्य उपासना का पर्व है। खरमास के बाद आज से शुभ कार्याें की शुरूआत हो रही है।

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है।

मुख्यमंत्री ने इसके पहले छत्तीसगढ़ महतारी के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्जवलित करने के उपरांत पतंग उड़ाकर पतंग उत्सव (Patang Utsav Chhattisgarh) की शुरूआत की।

इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे। गौरतलब है कि संस्कृति विभाग द्वारा सांस्कृतिक समागम के रूप में विभिन्न समाजों की सहभागिता से पतंग उत्सव (Patang Utsav Chhattisgarh) का आयोजन किया गया।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों से आज मकर संक्रांति के शुभ अवसर से प्राण प्रतिष्ठा तक सभी धर्म स्थलों में सफाई का कार्य करने का आह्वान किया है।

इसी क्रम में हम लोगों ने आज श्रीराम मंदिर परिसर में सफाई का कार्य कर अभियान की शुरूआत की।

मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि वे भी अपने आसपास के धर्म स्थलों, आस्था के केन्द्रों, मंदिरों, गुरूद्वारों में सफाई का काम करें। प्राण प्रतिष्ठा के दिन 22 जनवरी को रात में घरों में दीप जलाएं, ऐसा उपाय करें सम्पूर्ण वातावरण राममय हो जाए। (Patang Utsav Chhattisgarh)

Patang Utsav Chhattisgarh

संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज मकर संक्रांति भगवान सूर्य के दक्षिणायण से उत्तरायण होने का शुभ दिन है।

यह खुशी की बात है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के हाथों छत्तीसगढ़ में विकास की नई शुरूआत हो रही है। पूरे हिन्दुस्तान में यह पर्व मकर संक्रांति, पोंगल, गुड़ीपड़वा और लोहड़ी आदि के नाम से मनाया जाता है।

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धान कटाई के बाद यह पर्व पूरे भारत में मनाया जाता है और यह कामना की जाती है कि सभी घरों में कोठार धन-धान्य से भरे रहें। आज से अयोध्या में प्रभु रामलला के प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान शुरू हो रहा है।

आज गुजराती, तेलुगू, महाराष्ट्रियन, सिक्ख, मारवाड़ी सहित विभिन्न समाज मिलकर पतंग उत्सव (Patang Utsav Chhattisgarh) मना रहे हैं। यह देश की एकता और अखण्डता का प्रतीक है।

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