उत्तर बस्तर (कांकेर) | भारतीय जनता पार्टी ने आदिवासी मुख्यमंत्री, सामान्य वर्ग का प्रदेश अध्यक्ष एवं उपमुख्यमंत्री साथ ही अन्य पिछड़ा वर्ग का एक और उप मुख्यमंत्री बनाकर सामाजिक अभियांत्रिकी ऐसा अकाट्य व्यू रच लिया है जिससे पार्टी पर कोई भी किसी भी वर्ग की अवहेलना का आरोप नही लगा सकता। Politics bastar bjp

छत्तीसगढ़ में मंत्रियों को सौंपा गया उनका विभाग जाने किसे क्या मिला? cabinet ministers chhattisgarh

मंत्री मंडल के बंटवारे में भी सोशल इंजीनियरिंग और जाति के राजनीति के मद्दे नजर 9 मंत्रियों को काफी सोच समझकर पदभार दिया गया है। हमारे पूर्व लेख में हमने विस्तार से बस्तर की सामाजिक भौगोलिक राजनीतिक विषय पर गहन चर्चा की जिस पर मुहर लगाते हुए बस्तर क्षेत्र से केदारनाथ कश्यप को मंत्री बनाया गया। Politics bastar bjp

लेकिन एक मोर्चा ऐसा है जिसमे बीजेपी अब भी पिछड़ी हुई है। हो सकता है बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने इसपर कोई खास रणनीति बनाई हो। वह विषय क्या है आइए चर्चा करते है।

छत्तीसगढ़ में जाति की राजनीति

हम सभी जानते है छत्तीसगढ़ एक आदिवासी बहुल क्षेत्र है। जहां करीब 32% आबादी जनजातियों की है और 40% के आस पास ओबीसी वर्ग निवासरत है। जबकि अनुसूचित जनजातियों की आबादी करीब 13% है। इसमें खड़ी रूप में नीचे उतरे तो हम पाएंगे। सबसे ज्यादा जनसंख्या गोंड समाज की करीब 19-20% साहू समाज जिनकी जनसंख्या करीब 15-17% है। इसी लिए पूरे प्रदेश की राजनीति इसी के इर्द गिर्द घूमती रही है। Politics bastar bjp

कांग्रेस ने गोंड समाज के मरकाम, टेकाम, नेताम जैसे नेताओं को कई महत्वपूर्ण पद दिए थे वही भाजपा ने भी वर्तमान मंत्रीमंडल में रामविचार नेताम को जैसे बड़े गोंड नेता को मंत्रीमंडल में स्थान दिया है। लता उसेंडी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया है एवं रेणुका सिंह, विक्रम उसेंडी, नीलकंठ टेकाम जैसे कई नेताओं को मंत्रीमंडल में स्थान देने के बारे में संभवतः विचार कर रही है इसीलिए अभी तक केवल 9 मंत्री ही बनाए गए है। Politics bastar bjp

संगठन में बड़े फेरबदल संभव

अब भाजपा जब आगामी लोकसभा चुनाव के पूर्व जब संगठन की पुनर्रचना कर रही है ऐसे समय में किसी आदिवासी गोंड नेता को पार्टी का महामंत्री बनाकर भी गोंड समाज को साध सकती है। भाजपा के 3 महामंत्री में से एक तो जरूर ही गोंड समाज से होना चाहिए। साथ ही अन्य पदाधिकारियों की भी सूची में आदिवासी नेताओं के नाम शुमार होने चाहिए।

भाजपा ने आरक्षित अनारक्षित सीटों को मिलाकर कुल 18 आदिवासी सीटों पर अपना कब्जा जमाया इनाम स्वरूप आदिवासी मुख्यमंत्री और 2 आदिवासी मंत्री बनाया। जबकि ओबीसी वर्ग से 19 MLA प्रदेश में चुनकर आएं है और इनमे से 6 को मंत्री बनाया गया है। लेकिन बीजेपी इस गणित का आंकलन करने में विफल रही कि कांकेर एवं मध्यक्षेत्र से किसी आदिवासी गोंड नेता को मंत्री बनाया जाना या महत्वपूर्ण पद दिया जाना आवश्यक है। Politics bastar bjp

कांकेर की राजनीति बेहद रोचक

भाजपा कांकेर से एक मंत्री सदैव ही मंत्रीमंडल में शामिल करती रही है जिसका फायदा उन्हे कांकेर लोकसभा सीट को जीतने में होता रहा है।2013 से 2018 में कांकेर से भाजपा ने कोई मंत्री नहीं बनाया तो 2018 के विधानसभा चुनाव में इसका स्पष्ट प्रभाव पूरे बस्तर में दिखाई दिया। अभी आदिवासी गोंड समाज के किसी बड़े नेता को कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी गई है इसलिए प्रदेश के सामाजिक संगठनों में बीजेपी के प्रति अंदरुनी नाराजगी है।

कांकेर में भाजपा की हालत खराब

बालोद जिले की 3 विधानसभा सीटें बीजेपी हार चुकी है। भानुप्रतापपुर हार चुकी है, सिहावा भी भाजपा हार चुकी है। कांकेर विधानसभा की 8 सीटों में से 5 में बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। कांकेर विधानसभा सीट भी मुश्किल से जीत सकी है। नही तो क्षेत्र में केवल 2 सीटों से ही संतोष करना पड़ता।

इस रुझान और आंकड़े से समझा जा सकता है क्षेत्र के सबसे बड़े जातीय समुदाय को अपने पक्ष में करने के लिए बीजेपी को कुछ बड़ा कदम उठाना होगा। भाजपा ने बस्तर में जो गलती पिछले लोकसभा चुनाव में की उसकी पुनरावृत्ति इस लोकसभा में कांकेर लोकसभा सीट पर न हो इसलिए किसी बड़े गोंड नेता को कुछ बड़ा सांकेतिक पद देना होगा। Politics bastar bjp

आदिवासी गोंड नेताओं का केवल कांकेर में ही प्रभाव नहीं है बल्कि मैदानी क्षेत्र के कई विधानसभा सीटें जैसे मोहला मानपुर, खुज्जी, खैरागढ़, बिंद्रानवागढ़, पालीतानाखार, खल्लारी, एवं दुर्ग बिलासपुर के कई संभाग में महत्वपूर्ण प्रभाव रखता है। गौरतलब है कि विगत विधानसभा चुनाव में भाजपा उपरोक्त उल्लेखित सभी सीटों में चुनाव हार चुकी है।

मध्य छत्तीसगढ़ में आदिवासी गोंड नेता की आवश्यकता

एक बात और जो मध्य छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज में भाजपा के लिए नाराजगी का कारण बनती है, वह है मध्य छत्तीसगढ़ में एक भी आदिवासी गोंड नेता को बीजेपी ने नेता बनाकर नही उभारा है। जबकि इस क्षेत्र में आदिवासियों की अच्छी खासी जनसंख्या है।

बीजेपी का मास्टरकार्ड बाकी

भाजपा यद्यपि मोदी लहर, हिंदुत्व और विकासवाद के नारे के सहारे लोकसभा चुनाव जीतते रही है लेकिन तर्कयुक्त मजबूत सोशल इंजीनियरिंग को भी पार्टी समय के साथ अपनाती रही है। यही वजह है पैर से लेकर सर तक सभी जगह बदलाव में मुख्यकेंद्र में आज जाति की राजनीति है।

छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान के हाल ही चुनाव में बीजेपी ने सोशल इंजीनियरिंग का बखूबी उपयोग किया है। देखना रोचक होगा कांकेर और मध्य छत्तीसगढ़ के विषय में बीजेपी कौन सा मास्टर कार्ड खेलती है या फिर अति आत्मविश्वास में इस क्षेत्र में अपना जनाधार और खो देती है। Politics bastar bjp

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